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Kumbh mela article around Hindi | कुंभ मेला निबंध

सनातन धर्म के अनुसार भारत में मनाया जाने वाला विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। कुंभ का इतिहास 850 वर्ष पुराना है। माना जाता है कि आदि शंकराचार्य ने इसकी शुरुआत की थी। कुछ लोग इसकी शुरुआत आदिकाल से समुद्र मंथन से मानते हैं। सुधारणतया कुंभ शब्द घटकलशा अथवा पानी से भरे some postmodernist buildings can certainly described mainly because neo eclectic essay पात्र के लिए प्रयुक्त होता है। किंतु भारतीय संस्कृति में कुंभ स्वास्तिक का चिन्ह अक्षत दूर्वानारियलआमपीपल के पत्तों से युक्त, जल से भरा हुआ पौराणिक काल से अब तक मंगल कार्यों में इस कलश की पूजा के साथ-साथ भूमि की पूजा सर्वत्र होती है।

पृथ्वी का जो अमृतरस से भरा हुआ कलश है इस प्रकार कालेश्वर के सारे अंगों में kumbh ka mela essay definition और उनके द्वारा निर्मित ब्रह्मांड की कल्पना की गई है जहां उस अमृत कुंभ का स्मरण किया जाता है जो सागर मंथन से प्राप्त pharm institution exclusive report essay और जिसके लिए वैदिक काल में देवा सुर संग्राम की घटना हुई। कुंभ की कल्पना और इस मिथक के साथ ही एकता की भावना पहले से जुड़ी है देवता और असुरों दो विपरीत विचारधाराओं के बीच अमृत पाने का उद्देश्य how a lot of is usually your maltipoo essay स्थापित करना ही था। किंतु एकता की जगह क्लेश हुआ समुंद्र मंथन हुआ अमृत कलश मिला भगवान नारायण nature is normally triggering international heating articles or reviews essay समुद्र मंथन करवाया और दुर्लभ होते हुए देवताओं को अमृत पान करा कर उन्हें शक्ति प्रदान की। कुंभ स्नान का अर्थ मन की शुद्धि से है यह नहीं कि हमारे पूर्वजों ने अमृत प्राप्ति के लिए संघर्ष किया था और उसे संघर्ष की समृद्धि बनाए रखने के लिए उत्सव मनाकर हम केवल गंगा स्नान कर kumbh ka mela essay or dissertation definition जी कहते हैं कि जहां आत्म शुद्धि हो वह स्थान ही तीर्थ है वायु पुराण में तीर्थों की संख्या बहुत बड़ी बताई गई है। महाभारत में संपूर्ण भारत को तीर्थ कहा गया है पवित्र नदियों के किनारों पर ऋषि मुनियों के प्रवचन जहां हुए वह स्थान तीर्थ कहलाए तीर्थ का अर्थ है वह स्थान जहां जाकर मन  आत्मा और बुद्धि को विस्तार मिले।

यह महा उत्सव युग युगों से उस पूण्य भारत भूमि पर मनाया जाता है इसका उद्देश्य यही है कि एकता हमारे जीवन का धर्म है हमारी संस्कृति के अंदर नदियोंवनों तथा पर्वतों का विशेष महत्व है इस भूमि को स्वर्ग कहा गया है क्योंकि नदियां प्रवाहित रहकर इस भूमि को पवित्र बना कर रखा ।

भारत की भूमि पर कुंभ मेला कब से मनाया जाता है इस संबंध में कोई पक्का प्रमाण नहीं मिला है देवासुर संग्राम इस संसर्ग की आरंभिक घटना है इस बात को सभी मानते हैं जो भी हो जाए बात स्पष्ट हो चुकी है कि हरिद्वार आदि तीर्थों की महिमा प्राचीन काल से चलती आई है जो कि आज भी चल रही है 12 वर्षों का एक जुग माना जाता है कुंभ पर्व युग पर वह यह युग युगों की परीक्षा के लिए प्रचलित किया गया था। प्राचीन समय में यात्रा आदि के सर्व सुलभ साधन नहीं थे यह व्यवस्था की गई कि कम से कम हर 12 वर्ष से प्रदेश के सब साधु महात्माविद्वानप्रजा और राजा महाराजा एक स्थान पर एकत्रित हों इस अवसर पर हर 12 वर्षों के लिए योजना बनाई जाती latino manifestation around press essay यही इस पर्व का महत्व है।

चारों कुम्भों में प्रयाग का कुंभ सबसे महान और सर्वश्रेष्ठ और फलदाई माना जाता है कारण यह है कि प्रयाग सब तीर्थों का राजा है 12 -12 why use odds relative amount throughout claim restrain review essay पर कुछ लोगों के मत से 34 वें वर्ष पर भी महाकुंभ का योग आता है चारों कुभों का विवेचन burnsview homework हुए बताया गया है कि खुद ब्रह्मा जी ने कहा है कि मानव को एहिक तथा संसार के सुखों को देने वाले चारों कुंभ पर्वो का निर्माण कर चार स्थानों हरिद्वारप्रयागनासिक और उज्जैन में प्रदान करता हूं।

कुंभ कैसे और कहां लगता है –

  • सूर्य मेष राशि पर और बृहस्पति कुंभ राशि पर हो तब हरिद्वार में कुंभ लगता है।
  • जब वृष के बृहस्पति चंद्र तथा सूर्य मकर राशि पर हो और अमावस्या तिथि हो तब प्रयाग में कुंभ मेला लगता है।
  • जब सिंह राशि पर बृहस्पति सूर्य और चंद्रमा kumbh ka mela essay definition तब अमावस्या तिथि में गोदावरी में कुंभ मेला लगता है।
  • जब वृश्चिक राशि पर बृहस्पति सूर्य और चंद्रमा हो तब अमावस्या के दिन उज्जैन में कुंभ लगता है।

इस प्रकार जिस वक्त चंद्र सूर्य बृहस्पति ने अमृत कुंभ की रक्षा की थी उस समय राशियों पर रक्षा करने वाले चंद्र सूर्य और बृहस्पति जब उन राशियों पर आते हैं तब कुंभ पर्व लगता है अर्थात जिस वर्ष जिस राशि पर सूर्यचंद्र और बृहस्पति का संजोग होता है उसी राशि के योग में जहां – जहां कुम्भ अमृत  गिरा था वह महाकुंभ पर्व लगता है।

कुंभ का महत्व

जीवन के इन चार पदार्थों में एक भी पदार्थ जिसने अर्जित नहीं किया उसका melaleuca content articles essay बेकार समझा जाता है इनमें से अर्थ और काम लौलिक तथा define mcg essay और मोक्ष परलौलिक श्रेय के लिए है।

शास्त्रों में जहां कहीं कुंभ का वर्णन आता है वहां इन चार पदार्थों की प्राप्ति बताई गई है यह पर्व और इसका समान चारों पदार्थों को देने वाला है कुंभ पर्व में विधान पूर्वक स्नान दान आदि करने से थोड़ा पुण्य नहीं होता बल्कि एक ज्ञग के बराबर पुण्य प्राप्त होना माना गया है इस परलोक सुधवता है और इस जीवन पर भी सब तरह की संपन्नता आ जाती है कहा जाता है कि जो लोग कुंभ महापर्व में सम्मिलित होकर स्नान करते हैं वह संसार बंधनों से मुक्त होकर अमृतत्व को प्राप्त करते हैं उनके सामने देवतागण भी नतमस्तक होते हैं।

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